Home खबर उत्पन्ना एकादशी के व्रत से होने वाले लाभ को जाने

उत्पन्ना एकादशी के व्रत से होने वाले लाभ को जाने

189
0
क्यों ख़ास है उत्पन्ना एकादशी (Utpana Ekadashi) का व्रत जाने पूरी सच्चाई
क्यों ख़ास है उत्पन्ना एकादशी (Utpana Ekadashi) का व्रत जाने पूरी सच्चाई

व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण व्रत एकादशी का व्रत होता है एकादशी का व्रत रखने से हमारा मन शांत रहता है और बुरे विचार नहीं आते है पैसे और आरोग्य की समृद्वि मिलती है उत्पन्ना एकादशी का व्रत आरोग्य संतान प्राप्ति और मोक्ष प्राप्त करने के लिए किया जाता है उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है मौसम और स्वास्थ्य के लिए इस उत्पन्ना एकादशी के व्रत में फल खाना बहुत उचित रहता है यही कारन है की उत्पन्ना एकादशी के व्रत मे इस फल को शामिल किया गया है इस बार उत्पन्ना एकादशी कल यानी की 22 नवम्बर के दिन है।

उत्पन्ना एकादशी का महत्व 

उत्पन्ना एकादशी का महत्व 
उत्पन्ना एकादशी का महत्व

ऐसा कहा जाता है की उत्पन्ना एकादशी के दिन माता एकादशी का जन्म हुआ था जो लोग एकादशी का व्रत शुरू करना चाहते है उनके लिए यह एकादशी सबसे अच्छी है इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा होती है इस दिन नदी में नहाने को लेकर भी माना जाता है ऐसा माना जाता है की उत्पन्ना एकादशी के दिन ही भगवान श्री हरी ने मुर नाम के राक्षस को मार गिराया था।

उत्पन्ना एकादशी की कथा शुभ मुहूर्त

उत्पन्ना एकादशी की कथा शुभ मुहूर्त
उत्पन्ना एकादशी की कथा शुभ मुहूर्त

सतयुग में नूर नाम का राक्षस पैदा हुआ था वह बहुत ताकतवर और शक्तिशाली था इस खतरनाक राक्षस ने इंद्र आदित्य वासु अग्नि और वायु देवता को हराकर भगा दिया था तब सभी देवता डर के मारे भगवान शिव के पास गए और उन्हें साड़ी बाते बताई और बोले की है कैलाशपती! तीनो लोको के स्वामी भक्तो के दुखो को दूर करने वाले भगवान् विष्णु के शरणो में जाओ। वह ही तुम्हारी मदद कर सकते है इतना सुन कर सभी देवता क्षीरसागर जा पहुंचे और बोलने लगे की मधुसूदन आप हमारी रक्षा करे।

देवताओ ने कहा की राक्षसों ने हमे हरा करके हमे स्वर्ग से बहार निकाल दिया है आप उन सभी राक्षसों से हमारी रक्षा करे। इंद्र देव की बात सुनकर भगवान विष्णु बोले हे इंद्र ऐसा मायवी राक्षस कौन है जिसने आप सभी देवताओ को जीत लिया और उसका नाम क्या है उसमे कितना बल है और किसकी शरण में है वह उसका नाम क्या है वह रहता कहा है यह सब मुझे बातो यह सब सुनकर इंद्र देवता बोले भगवान प्राचीन समय में एक नाड़ीजंघ नाम का राक्षस था।

उस राक्षस के महापराकर्मी और लोकविख्यात मुर नाम का एक पुत्र हुआ है वह चन्द्रवती नाम की नगरी में रहता है उसी ने सभी देवता को स्वर्ग से निकालकर वहा पर अब अपना अधिकार जमा लिया है राक्षस ने इंद्र वायु अग्नि अरुण याम ईश चन्द्रमा आदि सभी ककी जगहों पर कब्ज़ा कर लिया है सूर्य बनकर खुद ही उजाला करता है खुद ही हम सभी के काम करता है।  हे असुर निकंदन! इस रक्षस को मरकर देवताओ को फिर से अमर बनाये।

यह बात सुनकर भगवान विष्णु बोले की हे सभी देवताओ आप सभी चंद्रावती नगरी की और जाओ और मै उस राक्षस का संहार करके आता हूँ इसके बाद विष्णु जी के साथ सभी देवता चंद्रावती नगरी की और प्रस्थान करे उस समय राक्षस मुर अपनी सेना के साथ युद्ध भूमि में लड़ने के लिए तैयार था जब खुद भगवान विष्णु रणभूमि में आये तो राक्षस मूर ने उनके ऊपर आक्रमण कर दिया और जिसके बाद मूर रक्षस विष्णु जी के ऊपर आयुध लेकर दौड़ा जिस पर विष्णु जी ने सर्प के सामने अपने बाणो से उसे बींध डाला बहुत से राक्षस मारे गए केवल मूर ही बचा रहा।

मूर भगवन विष्णु से युद्ध जारी रखा रहा भगवान् उस राक्षस के ऊपर जो भी तीक्षण बाण चलते वह उस राक्षस पर पुष्प की बारिश करते थे राक्षस का पूरा शरीर छिन्न-भिन्न हो गया परन्तु इसके बाद भी वह युद्ध करता रहा फिर दोनों के मध्ये मल्लयुद्ध भी हुआ।

इन चार राशियों के लिए ढेरो खुशियां लेकर आ रहा है सोमवार

ऐसा कहा जाता है यह युद्ध 10 हजार वर्षो तक चला था परन्तु मुर नहीं हारा था और थक करके भगवान विष्णु बद्रिकाश्रम चले गए थे यहाँ पर हेमवती नामक सुन्दर गुफा थी भगवान विष्णु उसमें आराम करने के लिए अंदर चले गए यह गुफा 12 योजन लम्बी थी और इसका द्वार एक ही था यहां पर भगवान् विष्णु योगनिद्रा की गोद में सो गए।

भगवान विष्णु का पीछा करते-करते राक्षस मुर वहा तक आ गया और विष्णु जी को सोता देखकर उसने उनके ऊपर प्रहार करना शुरू कर दिया था तभी उनके शरीर से एक चमकदार उजाला हुआ और कांतिमय वाली एक देवी प्रकट हुई देवी ने राक्षस मुर को युद्ध के लिए ललकारी और तुरंत मुर को मौत के घाट उतर दी।

श्री हरी जब योगनिद्रा की गोद से उठे तो सारी बात जानकार उस देवी से बोले की आपका जन्म एकदशी के दिन हुआ है अतः इसलिए आप उत्पन्ना एकादशी के दिन पूजी जायेगी आपके भक्त वही होंगे जो मेरे भक्त होंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here