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टेलीकॉम कम्पनिया दे सकती है फिर बड़ा झटका, एक बार फिर महंगा होगा मोबाइल रिचार्ज

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टेलीकॉम कम्पनिया दे सकती है फिर बड़ा झटका, एक बार फिर महंगा होगा मोबाइल रिचार्ज
टेलीकॉम कम्पनिया दे सकती है फिर बड़ा झटका, एक बार फिर महंगा होगा मोबाइल रिचार्ज

एक बार फिर महंगा होगा मोबाइल रिचार्ज

आपको यह तो पता होगा ही की इसी महीने 1 दिसम्बर के दिन सभी टेलिकॉम कम्पनियो ने अपना मोबाइल रिचार्ज महंगा करि थी। आपको फिर यह भी पता होगा की कम्पनी ऐसा क्यों कर रही है अगर नहीं पता है तो मैं आपको बताता हूँ। टेलिकॉम कम्पनियो ने 40% तक प्राइस को महंगा किया था जो की अब आने वाले समय में एक बार फिर टेरिफ प्लान बढ़ सकता है। कंपनियों के एक्सपर्ट का मानना है की घाटे से बचाने के लिए कम्पनिया ऐसा करने वाली है।

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टेलीकॉम कम्पनिया दे सकती है फिर बड़ा झटका, एक बार फिर महंगा होगा मोबाइल रिचार्ज
टेलीकॉम कम्पनिया दे सकती है फिर बड़ा झटका, एक बार फिर महंगा होगा मोबाइल रिचार्ज

सूत्रों के अनुसार सेल्युयर ऑपरेटर्स एसोशिएशन ऑफ़ इण्डिया ( Cellular Operators Association of India ) के डायरेक्टर राजन मैथ्यूज का कहना है की इंडस्ट्री के फाइनांशियल स्ट्रेस को सही करने के लिए टैरिफ महंगा होना चाहिए। राजन मैथ्यूज ने यह भी बताया की टेरिफ हाइक 200 रुपए ARPU ( Average revenue per user ) तक बढ़ना चाहिए।

टेलिकॉम कम्पनिया यह मामला TRAI ( Telecom Regulatory Authority of India ) के पास लेकर गई ताकि कॉल और डाटा की दरें तय की जा सकें। फ्लोर प्राइसिंग के लिए लिए एक डाटा भी तैयार किया गया है जिसके अंतर्गत इस अगले साल जनवरी में या फरवरी में टैरिफ प्लान चेंज किये जा सकते है। कंपनियों का कहना है की टैरिफ बढ़ाने के बाद से कई यूजर ने अपना रिचार्ज नहीं करवाया है।

फ़िलहाल इस समय Telecom Regulatory Authority of India स्टेक होल्डर्स के कमेंट का इन्तजार कर रहे है उनके जवाब के बाद यह तय किया जाएगा की टैरिफ में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी या इस बात पर फैसला लेंगे। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा की कम्पनिया टैरिफ बढाती है या नहीं।

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टेलिकॉम कम्पनी को एजीआर का 3 प्रतिशत स्पेक्ट्रम फीस और 8 प्रतिशत लइसेंस फीस के तोर पर सरकार को देना होगा कपंनी एडीआर के अनुसार टेलिकॉम ट्रिब्यूनल 2015 के फैसले के आधार पर निर्भर करती है ट्रिब्यूनल ने उस समय बोली थी की स्थायी सम्पति की बिक्री पर लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे नॉन कर स्त्रोतों से प्राप्त रेवन्यू को छोड़कर बाकि एजीआर में शामिल होगी। विदेशी मुद्रा विनिमय ( फॉरेक्स ) एड़जस्टमेन को भी एजीआर माना गया है हालंकि फसे हुए कर्ज, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कबाड़ की बिक्री को एजीआर से अलग रखा गया है दूरसंचार किराय, स्थायी सम्पति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त लाभ को भी एजीआर मानते है इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट टेलिकॉम कम्पनी से पैसे वसूलने के आदेश दी है।

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