Home Youth icon कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज...

कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज ताना आज सबकी जबान बंद

2
0
कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज ताना आज सबकी जबान बंद
कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज ताना आज सबकी जबान बंद

जैस की दोस्तों में हमेशा कहता हूँ की अगर आप अपने मन में ठान ले और किसी काम को करने के लिए अपना कदम आगे बढ़ा दिए है तो आप उसको तब तक पूरा करे जब तक सफलता खुद आकर आपके कदम नहीं चूमती है।

ऐसे ही हममे से कई लोग ऐसे होंगे जो IAS ऑफिसर बनकर देश की सेवा करने का सपना देखते है। लेकिन कई सुख-सुविधाओं के बावजूद आईएएस के एग्जाम में निकाल पाना हर किसी के बस की बात नही होती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो गरीबी और हर तरह की परीस्थितियों का सामना करते हुए आईएएस ऑफिसर बन जाते है। जी हाँ आज हम आपको हमारे ब्लॉग पर ऐसे ही एक शख्स से मिलवाने जा रहे है जिसकी कहानी आपको जरूर इंस्पायर, और आत्मविश्वास भर देगी।

तो दोस्तों ये कहानी किसी एक शख्स की सफलता की कहानी नही है बल्कि ये कहानी है दृढ़ संकल्प की, गरीबी और लाचारी की बेड़ियों को तोड़कर सफलता हासिल करने की, ये कहानी है एक रिक्शा चालक के बेटे की जो अपनी कठिन मेहनत से आईएएस ऑफिसर बनता है। तो आइये अब जानते है बिना किसी देरी के कैसे रिक्शा चालक का बेटा गोविंद जायसवाल आईएएस ऑफिसर बना और समाज के तानों को छोड़कर सफलता हासिल किया।

तो दोस्तों कहानी है साल 2006 में अपने पहले ही प्रयास में आईएएस परीक्षा में 45वीं रैंक हासिल करने वाले गोविंद जायसवाल की जिन्होंने अपनी पढ़ाई हिंदी माध्यम स्कूल से की। वही आपको जानकार आश्चर्य होगा की हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों में गोविंद ऑल इंडिया टॉपर रहे थे।

गोविंद जायसवाल का जन्म, परिवार और शिक्षा

कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज ताना आज सबकी जबान बंद
कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज ताना आज सबकी जबान बंद

गोविंद जायसवाल के शुरूआत जीवन के बारे में बात करें तो उनका जन्म 8 अगस्त 1983 को उत्तरप्रदेश के बनारस में हुआ था। गोविंद के पिता अनपढ़ है और बनारस में रिक्शा चलाने का काम करते थे। गोविंद ने शुरूआती पढ़ाई बनारस के उस्मानपुर क्षेत्र के एक स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने जौनपुर के ही एक कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की। गोविंद की माँ का बचपन में ही देहांत हो गया था। गरीबी ऐसी थी की पांच सदस्यों का परिवार एक ही कमरे में रहता था। गोविंद की तीन बहने थी। पिता नारायण जायसवाल ने चारों बच्चों की परवरिश के लिए दिन-रात मेहनत की। कड़ाके की सर्दी हो या फिर तेज गर्मी हो या फिर बारिश उनके पिता ने हर दिन रिक्शा चलाया और मेहनत करके अपने बच्चों का पेट भरा। घर की हालत देखकर गोविंद का आईएएस बनने का संकल्प और भी मजबूत हो गया। अब गोविन्द ने अपने मन और दिमाग में इस बात की गाठ बाँध ली कि अब किसी भी किमत पर आईएएस बनकर ही रहेंगे।

पढ़ाई में शुरू से ही तेज रहे गोविंद के पिता ने अपने बेटे के सपने आईएएस बनाने के लिए अपनी जमीन 40 हजार रूपये में बेच दी और आईएएस की तैयारी के लिए उन्हें दिल्ली भेज दिया। दिल्ली आने के बाद गोविंद के सामने रहने और खाने की समस्या खड़ी हो गई। तब उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। गोविंद रोजाना ट्यूशन पढ़ाने के साथ-साथ 18 घंटे तक पढ़ाई करते और कई बार तो पैसे बचाने के लिए खाना भी नही खाते थे।

कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज ताना आज सबकी जबान बंद
कैसे एक रिक्शेवाले का बेटा बना आईएएस, पिता को मारता था समाज ताना आज सबकी जबान बंद

गोविंद आईएएस एग्जाम के सब्जेक्ट चुनने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी बताते है वह कहते है कि मेरे एक दोस्त के पास इतिहास की किताबें थी, इसलिए मैने इतिहास ही विषय चुना। इसके अलावा वे साइंस के स्टूडेंट थे तो उनकी इस विषय पर भी अच्छी पकड़ थी। गोविंद बताते है कि जब उन्होंने आईएएस का एग्जाम दिया तो रिजल्ट के पहले उनके पिता चिंता के कारण कई रात सो नही पाए थे। और जब रिजल्ट आया तो सबकी आंखों में ख़ुशी के आँसू आ गये।

क्योंकि एक रिक्शा चलाने वाले के बेटे ने इतिहास में अपना नाम दर्ज कर दिया था। गोविंद ने पहले ही प्रयास में आईएएस के एग्जाम में ऑल इंडिया में 45वीं रैंक हासिल की। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और अपनी बहनों को देते है। खासकर बड़ी बहन को जिन्होंने माँ की मौत के बाद परिवार को संभाला और उनके लिए अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी।

गोविंद अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताते है कि अगर वो बुरे दिन नही होते तो वे सफलता का मतलब अपनी जिंदगी में कभी समझ नही पाते। फिलहाल गोविंद नागालैंड में रेवेन्यू एंड डिजास्टर मैनेजमेंट में ऑफिसर पद पर तैनात है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here