चंद्रमा,
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13 जुलाई की रात को क्यों खास होगा चंद्रमा, जानिए। 

इस साल की सबसे बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक ‘सुपरमून’  13 जुलाई यानी आज देखा जा सकता है। जब चंद्रमा (Moon) अपनी कक्षा में धरती (Earth) के सबसे करीब होता है तब सुपरमून दिखाई देता है। आज गुरु पूर्णिमा के दिन आसमान में सुपरमून का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं।

इस साल की सबसे बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक ‘सुपरमून’ (Supermoon 2022) 13 जुलाई यानी आज देखा जा सकता है। जब चंद्रमा (Moon) अपनी कक्षा में धरती (Earth) के सबसे करीब होता है तब सुपरमून दिखाई देता है। आज गुरु पूर्णिमा के दिन आसमान में सुपरमून का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। हर दिन की तुलना में चांद बहुत बड़ा, चमकीला और गुलाबी नजर आएगा।

 चंद्रमा,
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13 जुलाई को धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी सबसे कम हो जाएगी। सुपरमून के दौरान चंद्रमा की दूरी धरती से सिर्फ  357,264 किलोमीटर रहेगी। सुपरमून का असर समुद्र भी दिखाई देगा। सुपरमून की वजह से समुद्र में उच्च और कम ज्वार की बड़ी श्रृंखला देखी जा सकती है। खगोलविदों के मुताबिक, सुपरमून (Supermoon) के दौरान तटीय इलाकों में तूफान आ सकता है और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस साल सुपरमून 13 जुलाई की रात 12 बजकर 7 मिनट पर नजर आ सकता है, तो वहीं यह अगले साल तीन जुलाई को नजर आएगा।

13 जुलाई को धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी सबसे कम हो जाएगी। इस सुपरमून को बक मून (Buck moon) भी कहा जाता है। इसका यह नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि कहा जाता है कि साल के इस समय पर नर हिरण (buck) के नए सींग उगते हैं। बक्स के सींग हर साल गिराते हैं और फिर नए सींग आते हैं और साल बीतने के साथ उनके सींग और विशाल और खूबसूरत होते जाते हैं।

इसके अलावा इस दौरान परछाई की स्ट्रिप चांद पर बहुत पतली दिखाई देगी।इसके अलावा सुपरमून के कुछ घंटों बाद फुलमून नजर आएगा जिसे दो से तीन दिन तक देख सकते हैं। दरअसल यह फुलमून नहीं होगा, लेकिन चांद के आकार की वजह से उसी तरह नजर आएगा। चांद में बदलाव काफी धीरे होगा जिसकी वजह से फुलमून की ही तरह नजर आएगा। खुली आंखों से इस प्रकिया को देखना थोड़ा कठिन है।

जानिए किसे कहते हैं सुपरमून। 

 चंद्रमा,
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सुपरमून (Supermoon) का मतलब होता है चांद अपनी आकार से ज्यादा बड़ा दिखाई देगा। इसके साथ ही हर दिन से ज्यादा चमकदार नजर आएगा। यह इसलिए होता है कि इस दौरान चांद और धरती की दूरी बहुत कम हो जाती है। चांद धरती के पास आ जाता है।

इस स्थिति को परीजी (Perigee) कहा जाता है। इसके साथ ही धरती की परिक्रमा के दौरान चांद दूर भी जाता है जिसे अपोजी (Apogee) कहा जाता है। इस समय धरती और चंद्रमा के बीच दूरी 4,05,500 किमी होती है।

कैसे सुपरमून शब्द की हुई शुरुआत? 

सुपरमून शब्द की शुरुआत साल 1979 में हुई। ज्योतिषी रिचर्ड नोले ने इस शब्द को चलन में आया था। जब चंद्रमा धरती के निकटतम 90 फीसदी पेरिगी के दायरों में आता है, तो इस खगोलीय घटना को सुपरमून कहते हैं।
सुपरमून को बकमून के नाम से भी जानते हैं। इसके साथ दुनिया भर में इसको अलग-अलग नाम से जाना जाता है।

 चंद्रमा,
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कब दिखेगा सुपरमून। 

बुधवार शाम ढलने के लिए रात 9:44 बजे EDT (भारतीय समयानुसार सुबह 7:14 बजे) फुलमून भी दिखाई देगा।13 जुलाई 2022 यानी बुधवार को हमें आधी रात 12 बज के 3 मिनट पर ये दिखाई देगा. वहीं अगर आपने इसे इस बार मिस किया। NASA के अनुसार, सुपरमून बुधवार (13 जुलाई) को सुबह 5 बजे EDT (भारतीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे) पर पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर होगा, जो 3,57,264 किलोमीटर का perigee दूरी होगी।

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इसके अलावा इस दौरान परछाई की स्ट्रिप चांद पर बहुत पतली दिखाई देगी। चांद में बदलाव काफी धीरे होगा जिसकी वजह से फुलमून की ही तरह नजर आएगा। खुली आंखों से इस प्रकिया को देखना थोड़ा मुश्किल है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने कहा कि”चंद्रमा इस समय के आसपास लगभग तीन दिनों तक पूर्ण दिखाई देगा।

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