खालिद

काबुल

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अफगानिस्तान मूल के अमेरिकी लेखक Khalid होसैनी ने एक ट्विटर पोस्ट के जरिये बताया था कि उनकी बेटी ट्रांसजेंडर बन गई है. ओर मुझे उसपर गर्व है।  उन्होंने लिखा था कि ‘ मेरी बेटी हैरिस ट्रांसजेंडर के रूप में सामने आई है. मुझे उस पर इतना गर्व पहले कभी नहीं हुआ.  जितना ट्रांसजेंडर करवाने के बाद हो रहा है। उसने हमारे परिवार को सच्चाई और बहादुरी सिखाई है.

इस पोस्ट के पहले उन्होंने अपनी बेटी की बचपन की तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन में लिखा था की मेरी बेटी सुंदर, बुद्धिमान और प्रतिभाशाली है.  जिसको तस्वीर में हैरिस समुद्र तट पर अपने पिता के साथ गोद में नज़र आ रही है. इस्लाम धर्म में समलैंगिकता को समर्थन नहीं दिया जाता था , यही वजह है कि उनके इस पोस्ट पर कई लोगों ने अभद्र टिप्पणियां  भी की है. खुदा से डरने की नसीहत दे डाली. तो कई लोगों ने उनकी बेटी की हिम्मत की दाद दी थी

बेटी के फैसले पर गर्व

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होसैनी  ने अपनी बेटी के फैसले पर गर्व करते है. तथा उन्होंने कहा था कि मैं अपनी बेटी से बहुत प्यार करता हूं. मैं हर कदम पर अपनी बेटी के साथ हूं. और हमारा परिवार उसके सभी फैसलों का सम्मान करता है।

कौन है Khalid होसैनी 

Khalid होसैनी एक मशहूर व जाने माने लेखक है। होसैनी का जन्म अफ़गानिस्तान में हुआ था. उन्होंने कुछ समय ईरान और फ्रांस में रहकर भी  बिताया था . जब होसैनी 15 वर्ष के थे. तब उनके परिवार ने संयुक्त राज्य अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया था . जहां वे बाद में एक देशीय नागरिक बन गए. उनकी गिनती अंग्रेजी के बड़े लेखकों में होती है. अफगानिस्तान की समस्याओं पर लिखी उनकी किताबों को दुनिया भर में काफी पसंद किया जाता है।

नई दिल्ली
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अफगानी-अमेरिकी लेखक (Afghan-American writer) और उपन्यासकार Khalid होसैनी (Novelist Khalid Hosseini) ने अपनी बेटी को लेकर  बहुत बड़ी बात कही है. इस बात को लेकर जोरों से चर्चाएं पर हैं. ‘द काइट रनर’ और ‘ए थाउजेंड स्प्लेंडिड सन्स’ जैसे उपन्यास लिखने वाले Khalid होसैनी ने ट्वीट करते हुए अपनी बेटी पर एक बड़ा खुलासा किया था . जिसकी काफी सराहना की जा रही है।

खालिद होसैनी (Khalid Hosseini) का कहना है कि भावनात्मक, शारीरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप से हारिस (Haris) ने प्रत्येक चुनौती का सामना धैर्य और ज्ञान के साथ किया था। उनका कहना है कि वह अपनी बेटी के निडरता और साहस से काफी प्रेरित हुए हैं. फिलहाल इसे लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर Khalidहोसैनी की जमकर सराहना हो रही है.

दुनियाभर में चर्चित हुई थी पहली किताब

लेखक बनने से पहले खालिद एक डॉक्टर थे. उनके पिता डिप्लोमैट थे. खालिद इस वक्त संयुक्त राष्ट्र के गुडविल एंबेस्डर भी हैं. डॉक्टर के पेशे को मजबूरी बताते हुए खालिद हुसैनी ने इसे एक ‘अरेंज मैरिज’ करार दिया था. लेकिन जब उनकी किताब द काइट रनर आई तो पाठकों ने इसे हाथोंहाथ लिया. यह किताब 101 हफ्ते तक द न्यू यॉर्क टाइम्स बेस्ट सेलर लिस्ट में शामिल हो गयी  थी. तीन बार यह नंबर एक पर रही थी.

2007 में आई थी दूसरी किताब, 103 हफ्ते रही बेस्ट सेलर
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इस किताब की सफलता के बाद खालिद फुल टाइम में  लेखक बन गए थे और साल 2007 में उनकी दूसरी किताब आई ‘ए थाउंज़ैंड स्प्लैंडिड सन्स’ ( A Thousand Splendid Suns) तो यह 103 हफ्ते तक बेस्ट सेलर लिस्ट में रही थी।

शरणार्थी अधिकारों के लिए काम करते हैं खालिद हुसैनी

लेखक होने के अलावा हुसैनी शरणार्थियों के अधिकारों के लिए भी काम करते हैं. उन गरीब लोगो को अधिकार दिलवाते थे।  संयुक्त राष्ट्र हाई किश्नर फॉर रिफ्यजीस के साथ मिलकर वो अफगान शरणार्थियों के लिए खालिद हुसैनी फाउंडेशन भी चलाते हैं।

खालिद हुसैनी के इस ट्वीट की सोशल मीडिया पर तारीफ कर रहे है कि.जहां एक तरफ दुनिया में ट्रांसजेंडर लोगों के साथ सबसे अच्छा  व्यवहार न करने के कई प्रमाण मिलते हैं वहीं खालिद ने अपने बेटे के फैसले को सही ठहराया था।

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