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अंग्रेज भी ना सुलझा पाए थे राम मंदिर मुकदमा 1813 में पहली बार उठा था राम मंदिर का मुकदमा अब बंदी उम्मीद है

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1813 में पहली बार मंदिर का दावा किया गया हिंदू पक्ष की ओर से

हिंदू संगठनों ने 1813 में दावा किया था कि वर्षीय 1528 में बाबा ने राम मंदिर तोड़कर वहां मस्जिद बनाई अब दोनों पक्षों में हिंसा हुई 18 सो 59 में ब्रिटिश सरकार ने विवादित जगह पर तार की बाड़ सुनवाई 1885 में पहली बार मोहन पर रघुवर दास ने ब्रिटिश अदालत से मंदिर बनाने की अनुमति मांगी थी

1934 में पहली बार ढांचा गिराया गया

विवादित क्षेत्र पर हिंसा होने लगी पहली बार विवादित हिस्सा तोड़ दिया गया बीटी सरकार ने इसकी मरम्मत करवाई थी परंतु 23 दिसंबर 1949 को हिंदुओं ने केंद्रीय स्थल पर रामलला की मूर्ति रखी और पूजा शुरू कर दी थी इसके बाद मुस्लिम पक्ष में नमाज पढ़ना बंद कर दिया और वहां कोर्ट चले गए थे

1984 में बीच में मुद्दा बना दिया

वहीं विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद के ताले को खोलकर राम जन्म स्थान को स्वतंत्र कराने और विचार राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान शुरू कर दिया जगह-जगह प्रदर्शन किया भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को हिंदू अस्मिता से जोड़ते हुए संघर्ष की शुरुआत की थी

1986 बाबरी एक्शन कमेटी गठित की गई

फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने पूजा की इजाजत दी डाले दोबारा खोले गए नाराज मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित की और 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने ढांचा गिरा दिया दंगे हुए और अस्थाई राम मंदिर बनाया गया दिसंबर 1992 लिब्राहन आयोग गठित किया गया

2011 हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विवादित क्षेत्र को रामलला विराजमान निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी बॉर्डर की बराबर तीन हिस्सों में बांटने का फैसला कर दिया था फरवरी 2011 में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया गया मई 2011 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच में सुनवाई होना शुरू की गई

2017 से 2019 मध्यस्थता के सहारे प्रयास विफल रहे अब तक

सुप्रीम कोर्ट ने भेजे गए दस्तावेजों का अनुवाद ना होने का मामला टाल दिया गया सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की जो विफल रही 6 अगस्त 2019 से सुप्रीम कोर्ट ने रोज अयोध्या विवाद पर सुनवाई शुरू कर दी

अयोध्या विवाद पर 6 अगस्त 2019 से शुरू हुई मैराथन सुनवाई 16 अक्टूबर को खत्म होने की संभावना थी यह विवाद 15वीं सदी से चला आ रहा है लेकिन प्रमुखता से 1813 में पहली बार यह मुकदमा कोर्ट में गया था हाईकोर्ट ने 2010 से अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला किया था फिर 2011 में केस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था

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