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सर्दियों में खाने के फायदे क्या हैं। 

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तिल बहुत ही पौष्टिक होता है, जिसे आमतौर पर सर्दियों में खाया जाता है। अपनी गर्म प्रकृति की वजह से यह सर्दियों में शरीर को गर्माहट भी देता है। इसमें कई सोच में पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे कैल्शियम, विटामिन ई और बी विटामिन के अलावा प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा का बेहतरीन स्रोत है। Til

सेवन करने से ह्रदय के रोग और न्यूरोडीजेनरेटिव डिजीज सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की रोकथाम में योगदान करता है। तिल मुख्यता दो तरह के होते हैं, एक सफेद तिल तो दूसरा काला तिल के नाम से जाना जाता है।

तिल का परिचय

तिल और इसके तेल से सब परिचित हैं। जाड़े की ऋतु में तिल के मोदक बड़े चाव से खाए जाते हैं। रंग-भेद से तिल तीन प्रकार का होता है, श्वेत, लाल एवं काला। आयुर्वेद में औषधि के रुप में काले तिलों से प्राप्त तेल अधिक उत्तम समझा जाता है।

भारतवर्ष में तिल की प्रचुर मात्रा में खेती की जाती है। तिल (बीज) एवं तिल का तेल भारतवर्ष के प्रसिद्ध व्यावसायिक द्रव्य हैं। आज कल अधिकांश लोग पतंजलि तिल के तेल का इस्तेमाल करते हैं। Til

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बाल झड़ना, असमय सफेद बाल में तिल के तेल के फायदे

  • तिल की जड़ और पत्ते का काढ़ा बनाकर काढ़े से बाल धोने से बाल सफेद नहीं होते।
  • काले तिल के तेल  ( तिल का तेल पतंजलि) को शुद्ध अवस्था में बालों में लगाने से बाल असमय सफेद नहीं होते। प्रतिदिन सिर में तेल की मालिश करने से बाल सदैव सॉफ्ट, काले और घने बड़े रहते हैं।
  • तिल के फूल तथा गोक्षुर को बराबर लेकर घी तथा मधु में पीसकर सिर पर लेप करने से बालो का झड़ना तथा रूसी दूर होती है।
  • समान मात्रा में आँवला, काला तिल, कमल केसर तथा मुलेठी के चूर्ण में मधु मिलाकर सिर पर लेप करने से बाल लम्बे और काले होते हैं।

दंत रोग में तिल के फायदे

  • प्रतिदिन 25 ग्राम तिलों को चबा-चबा कर खाने से दांत मजबूत होते हैं।
  • मुंह में तिल को भरकर 5-10 मिनट रखने से पायरिया में लाभ होता है तथा दांत मजबूत हो जाते हैं।

पथरी में तिल के फायदे

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  • तिल की छाया-सूखे कोमल (125-250 मिग्रा) को प्रतिदिन खाने से पथरी गलकर अपने आप निकल जाती है।
  • तिल को फूलोंके 1-2 ग्राम क्षार में 2 चम्मच मधु और 250 मिली दूध मिला कर पिने से पथरी ठीक हो जाती हैं।
  • 125-250 मिग्रा तिल पञ्चाङ्ग भस्म को सिरके के साथ प्रात सायं भोजन करने से पहले सेवन करने से भी पथरी गलकर निकल जाती है।

गर्भाशय विकार में तिल के फायदे 

  • तिल को दिन में 3-4 बार खाने से गर्भाशय संबंधी रोगों में काफी लाभ होता है।
  • 30-40 मिली तिल काढ़े का सेवन करने से पीरियड्स के समय आने वाली समस्या से भी लाभ होता है।
  • रूई के फाहे को तिल के तेल में भिगोकर योनि में रखने से श्वेतप्रदर या सफेद पानी में लाभ होता है। तिल के तेल के फायदे सफेद पानी यानि ल्यूकोरिया में होता है।
  • 1-2 ग्राम तिल चूर्ण को दिन में 3-4 बार जल के साथ लेने से ऋतुस्राव यानि पीरियड्स नियमित हो जाता है।
  • तिल का काढ़ा बनाकर लगभग 30-40 मिली काढे को सुबह शाम पीने से मासिक-धर्म नियमित रूप से आने लग जाता हैं। Til

विष में तिल का प्रयोग

  • तिल और हल्दी को पानी में पीसकर मकड़ी के काटे हुए जगह पर लेप करने से मकड़ी का सारा विष उतर जाता है।
  • तिल को पानी में पीसकर काटे हुए स्थान पर लेप करने से बिल्ली का जहर उतर जाता हैं।

तिल का उपयोगी भाग

  • पतंजलि तिल का तेल त्वचा के लिए लाभकारी है। प्रतिदिन तिल तेल की मालिश करने से मनुष्य कभी भी बीमार नहीं होता। तिल तेल की मालिश से रक्त विकार, कमर दर्द, मसाज, गठिया का दर्द जैसे रोगों में  लाभ होता है।
  • तिल को पीसकर जले हुए स्थान पर लेप करने से जलन कम हो जाती हैं।
  • तिल के पत्तों को सिरके या पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द मिट जाता है।
  • तिल और सिरस की छाल को सिरके के साथ पीसकर मुंह पर लगाने से मुहांसे और फुंसिया ठीक हो जाते हैं।
  • चोट और मोच पर तिल की खली को पानी के साथ पीसकर गर्म करके बांधने से बोहोत फायदा होता है। Til
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तिल के साइड इफेक्ट

कुष्ठ, सूजन होने पर तथा प्रमेह यानि डायबिटीज के रोगियों को भोजन आदि में तिल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

तिल का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए

बीमारी के लिए तिल के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए तिल का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें। चिकित्सक के सलाह के अनुसार-

  • 3-6 ग्राम बीज चूर्ण,
  • 10-20 मिली तेल,
  • 30-40 मिली काढ़े का सेवन कर सकते हैं।

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