Sonu Sood: फिल्मों में विलेन से असल जिंदगी में हीरो बनने तक, सोनू सूद ने फैंस के बीच ऐसे बदल डाली अपनी छवि | Latest Updates 2022

Sonu Sood: फिल्मों में विलेन से असल जिंदगी में हीरो बनने तक, सोनू सूद ने फैंस के बीच ऐसे बदल डाली अपनी छवि | Latest Updates 2022

 

बॉलीवुड सिनेमा से जुड़े कलाकार फिल्मों में पॉजिटिव और निगेटिव हर तरह से रोल निभाते हैं लेकिन हर एक्टर्स की पहचान असल जिंदगी में लोगों के साथ किए गए व्यवहार से ही बनती है। एक्टर सोनू सूद ने बॉलीवुड से लेकर साउथ तक की बहुत फिल्मों में विलेन बनकर हीरो से बहुत पंगा लिया है।

सोनू
सोनू

लेकिन उनके फैंस के बीच ये सच्चे हीरो हैं। आज सोनू सूद अपना 49वां जन्मदिन मनाने जा रहे है। 30 जुलाई 1973 को जन्मे ये पंजाब के मोगा गांव से ताल्लुक रखते हैं।

इंजीनियरिंग को छोड़ उन्होंने एक्टिंग के क्षेत्र में अपना कदम रखा था और यहां पर अपना नाम बनाने के लिए इन्होने बहुत पापड़ भी बेले। आइए आज हम आपको एक्टर के करियर के साथ-साथ आम लोगों के बीच सुपर हीरो बनने तक की पूरी कहानी बताते हैं।

मॉडलिंग के बाद एक्टिंग में रखा कदम 

इन्होने ने अपनी स्कूल की पढ़ाई मोगा में ही की थी, उसके बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए नागपुर आ गए थे। उन्होंने नागपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स से इंजीनियरिंग भी की।

लेकिन यहां जब उनका मन नहीं लगा तो वो पढ़ाई छोड़ मॉडलिंग की दुनिया में आ गए। इनकी की पर्सनैलिटी स्टारडिंग से ही बहुत शानदार रही, जिस वजह से उन्हें मॉडलिंग के क्षेत्र में काम भी मिलने लगा था।

सोनू
सोनू

वो मिस्टर इंडिया के कंपटीशन का हिस्सा भी रहे हैं और फिर उन्होंने एक्टिंग की ओर अपने कदम बढ़ा दिए थे। वो जब मुंबई आए थे, तब उनकी जेब में महज 5 हजार रुपये ही थे। लेकिन उन्होंने अपनी शुरुआत साउथ इंडस्ट्री से ही की थी।

विलेन बन बनाई पहचान

इनकी फिल्मी दुनिया में हीरो बनने के लिए आए थे, लेकिन टाइम के साथ उन्होंने एक बहुत दमदार विलेन की पहचान बना ली। उनकी पहली फिल्म ‘कल्लाझागर’ थी, जो की साल 1999 में रिलीज हुई थी और बॉलीवुड में उन्होंने साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म ‘शहीद ए आजम’ से अपनी शुरुआत की थी।

इस फिल्म में एक्टर ने भगत सिंह का रोल निभाया था। लेकिन इनके के करियर के लिए तेलुगू फिल्म ‘अंरुधति’ टर्निंग प्वाइंट बनी। इस फिल्म ने एक्टर को सिनेमा जगत में अपनी असली पहचान दिलाई। ‘दबंग’, ‘सिंबा’ जैसी फिल्मों में विलेन के किरदार में सोनू बहुत पसंद किए गए।

पैनडेमिक में बने लोगों के मसीहा 

ये जरूर फिल्मों में विलेन बनते हैं लेकिन असल जिंदगी में वो हीरो से कम नहीं। अभिनेता कोरोना वायरस जैसे पैनडेमिक में गरीब लोगों की बहुत मदद की और उनके लिए आगे आये।

जब लॉकडाउन में लाखो लोग शहरों से पैदल अपने गांव जाने पर मजबूर हो थे तब सोनू सूद ने प्रवासी मजदूरों को बस-ट्रेन की सुविधा देकर उन्हें अपने घर पहुंचाया था। इतना ही नहीं, उन्होंने गरीब लोगों को काम धंधे से लेकर इलाज की व्यवस्था भी खुद की, जिसके बाद लोगों ने उन्हें मसीहा नाम भी दिया।

मसीहा की छवि से निगेटिव रोल मिलने हुए बंद?

सोनू सूद ने अपना एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें इन्होने ने खुलासा किया था कि मसीहा वाली छवि के बाद उन्हें विलम के रोल मिलने बंद हो गए हैं। इन्होने ने कहा था कि कौन रियल लाइफ हीरो को बड़े पर्दे पर एक विलेन के रूप में देखना पसंद नहीं करेगा।

सोनू
सोनू

अब इंडस्ट्री में कोई भी मुझे विलम का रोल नहीं दे रहा है। यहां तक कि मेरे साइन किए हुए प्रोजेक्ट्स हैं, उनकी स्क्रिप्ट्स में बदलाव भी किए जा रहे हैं। मुझे लगता है कि मेरे लिए ये सब कुछ नया है। में उम्मीद करता हूं कि ये मेरे लिए बेहतर ही हो।

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