News7todays
Uncategorized

ममता बनर्जी तीसरी बार बनी बंगाल की मुख्यमंत्री परन्तु 6 महीने के भीतर जीतना होगा किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव, अगर नहीं जीती तो होगा कुछ ऐसा

ममता बनर्जी तीसरी बार बनी बंगाल की मुख्यमंत्री परन्तु 6 महीने के भीतर जीतना होगा किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव, अगर नहीं जीती तो होगा कुछ ऐसा

जैसा की आप सभी जानते है की कोलकाता यानी की पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी आज तीसरी बार बंगाल के मुख्यमंत्री रूप में पद की शपथ ले ली। ये दूसरा मौका है जब ममता बंगाल विधानसभा की विधायक नहीं चुने जाने के बाद भी प्रदेश की कमान संभाल रही हैं। इससे पहले 2011 में जब ममता पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं तो वो लोकसभा सांसद थीं।

इस बार वो नंदीग्राम से अपने पुराने सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से बुरी तरह चुनाव हार गई हैं। हार के बाद भी ममता राज्य की मुख्यमंत्री बन सकती हैं, लेकिन छह महीने के भीतर उन्हें राज्य की किसी विधानसभा सीट से चुनाव जीतना जरुरी है। अगर ऐसा नहीं होता तो उन्हें मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ेगा या फिर सरकार गिरानी पड़ेगी।

कब तक बिना विधायक के मुख्यमंत्री रह सकती हैं ममता? (How long can Mamata remain Chief Minister without an MLA?)

ममता बनर्जी तीसरी बार बनी बंगाल की मुख्यमंत्री परन्तु 6 महीने के भीतर जीतना होगा किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव, अगर नहीं जीती तो होगा कुछ ऐसा
ममता बनर्जी तीसरी बार बनी बंगाल की मुख्यमंत्री परन्तु 6 महीने के भीतर जीतना होगा किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव, अगर नहीं जीती तो होगा कुछ ऐसा

एक मई से शुरू होने वाले टीकाकरण पर कांग्रेस शासित राज्यों ने खड़े किए हाथ, जानें क्‍या कहा

भारत के संविधान का आर्टिकल 164(4) में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी राज्य में मंत्री पद की शपथ ले सकता है, लेकिन छह महीने के भीतर उसे किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतना होगा। अगर राज्य में विधान परिषद है तो वो MLC के रूप में भी चुना जा सकता है। मुख्यमंत्री भी एक मंत्री होता है, इसलिए यही नियम उस पर भी लागू होता है।

छह महीने बाद क्या दोबारा शपथ लेकर और छह महीने के लिए मुख्यमंत्री नहीं बन सकतीं ममता? (Will Mamata not take oath again after six months and become chief minister for six months?)

सुप्रीम कोर्ट ने 2001 में किसी मंत्री या मुख्यमंत्री को बिना किसी सदन का सदस्य बने दोबारा शपथ लेने पर रोक लगा दी थी। ये आदेश पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के बेटे तेज प्रकाश सिंह को मंत्री बनाए जाने के मामले को लेकर सामने आया था। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का विधायक या MLC बने दो बार मंत्री नहीं बन सकता है।

वैसे भी बंगाल में 1969 में विधान परिषद खत्म कर दी गई थी। ऐसे में ममता को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए छह महीने के भीतर किसी भी एक सीट से विधानसभा चुनाव जीतना ही होगा।

ममता उप-चुनाव में हार गई तो क्या होगा? क्या पहले ऐसा हुआ है? (What will happen if Mamata loses in the by-election?)

ममता बनर्जी तीसरी बार बनी बंगाल की मुख्यमंत्री परन्तु 6 महीने के भीतर जीतना होगा किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव, अगर नहीं जीती तो होगा कुछ ऐसा
ममता बनर्जी तीसरी बार बनी बंगाल की मुख्यमंत्री परन्तु 6 महीने के भीतर जीतना होगा किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव, अगर नहीं जीती तो होगा कुछ ऐसा

टीके की कीमतों को लेकर सियासत तेज, आपस में भिड़े भाजपा और कांग्रेस, जानें किसने क्‍या कहा

उप-चुनाव में हार के बाद ममता को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई और विकल्प उनके सामने नहीं रह जाएगा। मुख्यमंत्री पद पर रहते नेता चुनाव नहीं हारते, ऐसा नहीं कह सकते हैं। 2009 में झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन तमाड़ सीट से उप-चुनाव हार गए थे। इसके बाद झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था। संभवत: ये दूसरा मौका था जब कोई सीएम उप-चुनाव में हारा था।

इससे पहले 1970 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह गोरखपुर की मणिराम सीट से उप-चुनाव हारे थे। तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी त्रिभुवन नारायण के खिलाफ प्रचार करने पहुंची थीं। ये पहला मौका था जब किसी उप-चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री ने रैलियां की थीं। हार के बाद त्रिभुवन नारायण को पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद कांग्रेस के कमलापति त्रिपाठी राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।

Related posts

मुसीबत के स्थानों में अपराध को खत्म करने के लिए शेरिफ की अपराध न्यूनीकरण इकाई काम करती है | पश्चिमी कोलोराडो

admin

स्वस्तिक की छवि से परेशान छात्र – GW Hatchet

admin

देश में अब होने लगी है प्याज की चोरी

admin

Leave a Comment