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Happy Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति पर शेयर करें ये शुभकामना संदेश

Happy Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य भगवान को समर्पित है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। भारत के कई हिस्सों में लोग ... Read moreHappy Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति पर शेयर करें ये शुभकामना संदेश
 
Happy Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति पर शेयर करें ये शुभकामना संदेश

Happy Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य भगवान को समर्पित है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। भारत के कई हिस्सों में लोग पतंग उड़ाते हैं, तो कई इस दिन गंगा स्नान और दान करते हैं। इस दिन तिल के लड्डू, तिल की गजक, मूंगफली, खिचड़ी आदि दान किया जाता है। इस मौके पर सभी एक दूसरे को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हैं। यहां हम भी आपके लिए लाएं है मकर संक्रांति के मैसेज और शुभकामना संदेश: तिल के पकवानों की मिठास जिंदगी में बहार पतंग की तरह आकाश में बुलंदी पाएं मेहनत वाली पतंग की डोर से Happy Makar Sankranti मीठी बोली, मीठी जुबान मकर संक्रांति का यही पैगाम मकर संक्रांति की शुभकामनाएं Happy Makar Sankranti

Happy Makar Sankranti 2020: क्‍यों मनाते हैं मकर संक्रांत‍ि, कब है, जानें त‍िथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और फूड…

Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति कब है अगर आप भी यही जानना चाहते हैं तो हम आपको बता दें क‍ि 15 जनवरी, 2020 के दि‍न यानी बुधवार को मकर संक्रांत‍ि (Makar Sankranti 2020) का त्‍योहार मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का महत्‍व (Makar Sankranti Significance) इसी बात से समझा जा सकता है क‍ि तकरीबन पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है.

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Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति कब है अगर आप भी यही जानना चाहते हैं तो हम आपको बता दें क‍ि 15 जनवरी, 2020 के दि‍न यानी बुधवार को मकर संक्रांत‍ि (Makar Sankranti 2020) का त्‍योहार मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का महत्‍व (Makar Sankranti Significance) इसी बात से समझा जा सकता है क‍ि तकरीबन पूरे उत्तर भारत में जैसे दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, बंगाल और उड़ीसा में मनाया जाता है. आमतौर पर 14 और 15 जनवरी के दि‍न मकर संक्रांति बनाई जाती है. चल‍िए जानते हैं कैसे मनाते हैं मकर संक्रांत‍ि. इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और पतंगें उड़ाते हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मकर संक्रांति के मौके पर कुंभ (Kumbh 2020) की शुरुआत हो रही है जहां लाखों लोग गंगा किनारे इकट्ठा होकर स्नान (Ganga Snan) करेंगे. इसके साथ ही साथ ठंड से परेशान लोगों के लिए भी यह एक राहत भरा द‍िन है, क्‍योंक‍ि इसी दिन से मौसम करवट लेना शुरू कर द‍ेता है और मौसम हल्‍का हल्‍का गर्म होना शुरू हो जाता है. इसे बाद बसंत ऋतु (Basant Ritu) का आगमन होता है.

कब है मकर संक्रांत‍ि 2020 : त‍िथ‍ि, शुभ मुहूर्त, इतिहास, महत्‍व और पूजा वि‍धि (Makar Sankranti 2020: Date, Time, Puja Muhurat, History, Significance)

मकर संक्रांत‍ि पर फूड (Makar Sankranti 2020: Food)

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happy Makar Sankranti wish

मकर संक्रांत‍ि के मौके पर उत्तराखंड में क्‍या बनाया जाता है: मकर संक्रांत‍ि के मौके पर आंचल के अनुसार ही आहार और खाने-पीने की चीजें भी बनाई जाती हैं.  उत्तराखंड में मीठे आटे को घी में डीप फ्राई करके स्वीट डिश बनाने की अनोखी परंपरा है. इन मिठाईयों को अलग-अलग आकार में बनाया जाता है, और काले कौव्वे को खिलाया जाता है.

मकर संक्रांत‍ि के मौके पर पंजाब में क्‍या बनाया जाता है:  वहीं पंजाब मकर संक्रांति के व्यंजनों में गजक, रेवड़ी और तिल के लड्डू मुख्य रूप से बनाए जाते हैं.

मकर संक्रांत‍ि के मौके पर महाराष्‍ट्र में क्‍या बनाया जाता है:  महाराष्ट्र में लोग इस त्योहार पर एक-दूसरे को तिल के लड्डू खिलाते हुए कहते हैं ‘तिल-गुल घ्या, आणि गोड-गोड बोला. इसका मतलब होता है कि तिल और गुड़ खाओ और अच्छा-अच्छा बोलो. महाराष्ट्र में इस वक्त पूरन पोली भी तैयार की जाती है, जो कि मूंग के साथ मीठी रोटी होती है.

मकर संक्रांत‍ि के मौके पर उत्तर भारत में क्‍या बनाया जाता है:  वहीं तिल चिक्की, गजक, रेवड़ी, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में इस त्योहार पर खूब पसंद की जाती है.

मकर संक्रांत‍ि के मौके पर बि‍हार में क्‍या बनाया जाता है:  बिहार में लोग दही चूरा और गुड़ में पके हुए चावल बनाते हैं. इसके साथ ही कई मसालों में बनी स्वादिष्ट खिचड़ी भी यहां बनाई जाती है. तिल के लड्डू, गुड़ से बने लड्डू भी यहां खूब पसंद किए जाते हैं.

बंगाल में कैसे मनाते हैं मकर संक्रांत‍ि: बंगाल की पौष संक्रांति में दूध पुली बनाई जाती है जो नारियल-गुड़ में बने चावल और आटे की पकौड़ी होती है, वहीं पीठे की पुली, पेष्टीपा, रसगुल्ला भी इस दिन बनाए जाते हैं. गुजरात में लोग इस दिन स्वादिष्ट अंहियो तैयार करते हैं.

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2020: Date, Time, Muhurat)

कब है मकर संक्रांति 2020- 15 जनवरी
संक्रांति काल- 15 जनवरी को सुबह 07:19 बजे से
मकर संक्रांत‍ि का पुण्यकाल- 15 जनवरी को 07:19 से 12:31 तक
मकर संक्रांत‍ि का महापुण्य काल- 07:19 से 09: 03 बजे तक
मकर संक्रांत‍ि के स्नान का समय- 15 जनवरी 2020 को सुबह-सुबह

मकर संक्रां‍ति पूजा व‍िध‍ि (Makar Sankranti Puja Vidhi)

मकर संक्रांति के द‍िन व्रत रखने का प्रावधान माना जाता है. इस द‍िन पूजा करने के लिए तिल को पानी में मिलाकार नहाने की बात कही जाती है. पूजा से पहले नहाने के पानी में गंगा जल भी ड़ाला जा सकता है. नहाने के बाद सूर्यदेव की पूजा-अर्चना की जाती है. वहीं, मकर संक्रांति पर पूर्वजों और पितरों को तर्पण करने का भी प्रावधान है.

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माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। इस त्योहार का हर प्रांत में अलग-अलग महत्व है। खासकर इस त्योहार में सूर्य वंदना, पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ खाने तथा दान-पुण्य करने का खास महत्व होता है।

1.सूर्य आराधना का दिन : इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। चन्द्र के आधार पर माह के 2 भाग हैं- कृष्ण और शुक्ल पक्ष। इसी तरह सूर्य के आधार पर वर्ष के 2 भाग हैं- उत्तरायन और दक्षिणायन। इस दिन से सूर्य उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व ‘उत्तरायन’ के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति के बीच के 6 मास के समयांतराल को उत्तरायन कहते हैं। इस दिन से दिन धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है और रातें छोटी।
2. पतंग महोत्सव का पर्व : यह पर्व ‘पतंग महोत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। अत: उत्सव के साथ ही सेहत का भी लाभ मिलता है।
3. स्नान, दान, पुण्य और पूजा : माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है। इस दिन विशेष तौर पर गायों को हरा चारा खिलाया जाता है। इस दिन गंगासागर में मेला भी लगता है। इसी दिन मलमास भी समाप्त होने तथा शुभ माह प्रारंभ होने के कारण लोग दान-पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं। इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है।
4. तिल गुड़ खाना : सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारियां जल्दी लगती हैं इसलिए इस दिन गुड़ और तिल से बने मिष्ठान्न या पकवान बनाए, खाए और बांटे जाते हैं। इनमें गर्मी पैदा करने वाले तत्वों के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी होते हैं। उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बांटा जाता है।
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