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बसंत पंचमी पर सरस्वती माँ पूजा क्यों की जाती है

बसंत पंचमी पर सरस्वती माँ पूजा क्यों की जाती है

हिन्दू पंचांग के मुताबिक बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना की जाती है। ये त्योहार भारत के आलावा बांग्लादेश और नेपाल में भी बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग पीले रंग का वस्त्र धारण कर सरस्वती मां की पूजा भी करते हैं। इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। इस ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवे दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा भी की जाती है, जिससे यह बसंत पंचमी का पर्व कहलाता है। इस बार बसंत पंचमी का पर्व 30 जनवरी को मनाया जा रहा है।

बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी पर सरस्वती माँ पूजा क्यों की जाती है
बसंत पंचमी पर सरस्वती माँ पूजा क्यों की जाती है

पंचमी तिथि 29 जनवरी को सुबह 10.46 बजे लग जाएगी लेकिन सूर्योदय का समय न होने की वजह से बसंत पंचमी 30 जनवरी को ही मनाया जाएगा। पंचमी तिथि 29 जनवरी सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर 30 जनवरी तक दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसलिए 30 जनवरी को सूर्योदय के बाद बसंत पंचमी की पूजा की जाएगी।

बसंत पंचमी पर बन रहा है यह विशेष संयोग

बसंत पंचमी पर सरस्वती माँ पूजा क्यों की जाती है
बसंत पंचमी पर सरस्वती माँ पूजा क्यों की जाती है

इस बार की बसंत पंचमी विशेष है क्योंकि इस दिन सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दो शुभ मुहूर्त का संयोग बन रहा है। सिद्धि और सर्वार्थ-सिद्धि योग को विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह जैसे संस्कारों और अन्य शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना के साथ ही विवाह के शुभ मुहूर्त भी रहेंगे।

इस बार बसंत पंचमी इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि सालों बाद ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति इस दिन को और विशेष बना रही है। बसंत पंचमी के दिन 3 ग्रह स्वयं की ही राशि में रहेंगे। मंगल वृश्चिक में, बृहस्पति धनु में और शनि मकर राशि में रहेंगे। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए ये स्थिति बहुत ही शुभ मानी जाएगी ।

माँ सरस्वती की पूजा कैसे करें?

  • इस दिन पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत करें।
  • मां सरस्वती को पीले वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें और रोली मौली, केसर, हल्दी, चावल, पीले फूल, पीली मिठाई, मिश्री, दही, हलवा आदि प्रसाद के रूप में उनके पास रखें।
  • माँ सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले और सफ़ेद पुष्प दाएं हाथ से अर्पण करें।
  • अपर मिश्रित खीर अर्पित करना सर्वोत्तम होगा।
  • मां सरस्वती के मूल मंत्र ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप हल्दी की माला से करना सर्वोत्तम होगा।
  •  काले, नीले कपड़ों का प्रयोग पूजन में भूलकर भी ना करें। शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन विशेष पूजा करके उसको ठीक किया जा सकता है।

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