Home धर्म और आध्यात्मिक आखिर मां दुर्गा का “शेर” कैसे बना वाहन? जानिए इसके पीछे की...

आखिर मां दुर्गा का “शेर” कैसे बना वाहन? जानिए इसके पीछे की रोचक कहानी

363
0

आप सभी लोगों ने तस्वीरों के अंदर अलग-अलग देवी-देवता के अलग-अलग वाहन देखे होंगे, इसी प्रकार माता दुर्गा का भी शेर वाहन होता है, मां दुर्गा शेर पर सवार रहती हैं, किसी न किसी रूप में माता शेरावाली का वाहन शेर उनके साथ जरूर होता है, शेर की वजह से ही मां दुर्गा की पहचान मानी जाती है परंतु कभी आप लोगों ने इस बात पर सोच विचार किया है कि आखिर शेर पर सवार रहने वाली मां दुर्गा का शेर सवारी कैसे बना? और यह शेर पर ही सवार क्यों रहती है? शायद आप लोगों में से ऐसे बहुत से कम लोग होंगे जो बात को जानते होंगे कि शेर माता दुर्गा की सवारी किस प्रकार बना था।आज हम आपको मां दुर्गा की सवारी शेर कैसे बना? इससे जुड़ी हुई एक बहुत ही प्रचलित धार्मिक कहानी के बारे में जानकारी देने वाले हैं, इस कहानी को जानने के बाद आपको इस बात की जानकारी हो जाएगी कि आखिर मां दुर्गा हमेशा शेर पर सवार क्यों रहती है और शेर इनकी सवारी कैसे बना?

आखिर शेर मां दुर्गा की सवारी कैसे बना?

अगर हम धार्मिक कथा के अनुसार देखें तो एक समय पहले देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी, पार्वती जी की इस तपस्या का तेज का प्रभाव इतना अधिक था कि उनका गोरा रूप सावला हो गया था परंतु वह लगातार तपस्या में लगी रही और आखिर में उनकी तपस्या सफल हो गई थी, उसके बाद भगवान शिव जी माता पार्वती जी के पति के रूप में प्राप्त हुए थे, एक बार शाम के समय भगवान शिव जी के साथ माता पार्वती जी कैलाश पर्वत पर बैठकर हंसी-मजाक करने में लगे हुए थे, भगवान शिव जी ने मजाक-मजाक में पार्वती जी के रंग को देखकर उनको काली कहकर बुला दिया था, शिव जी के इस शब्दों को सुनकर पार्वती जी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा और वह उसी समय कैलाश पर्वत छोड़कर वन में अपना गोरा रंग पुनः प्राप्त करने के लिए तपस्या करने चली गई थी।

जब माता पार्वती जी वन के अंदर तपस्या में लीन बैठी हुई थी तब उसी समय एक भूखा शेर भी वहां पर आ पहुंचा था और पार्वती जी को खाने के लिए वहां पर बैठ गया, जब शेर ने देखा कि माता पार्वती जी तपस्या मे लीन बैठी हुई है तो वह चुपचाप वहीं पर बैठकर माता पार्वती जी को देखता रहा था, माता पार्वती जी की तपस्या सालों साल चलती रही, तब तक वह शेर वहीं पर माता पार्वती जी के पास ही चुपचाप बैठा रहा था, जब पार्वती जी की तपस्या समाप्त हुई तब वहां पर भगवान भोलेनाथ पहुंचे और उनको पुनः गोरा रंग का वरदान दिया था।जब माता पार्वती जी का गोरा रंग दोबारा से प्राप्त हो गया तब माता पार्वती जी ने शेर को अपने पास देखा, जब माता पार्वती जी सालों तक तपस्या कर रही थी तब तक शेर भी उनके साथ बैठा हुआ था, इसी वजह से माता पार्वती जी उससे अति प्रसन्न हुई और माता ने शेर को अपना वाहन बना लिया था, इसी वजह से शेर मां दुर्गा का वाहन बना था और शेर ही मां दुर्गा की पहचान है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here